Beware of the company of the wicked
Shloka
दुराचारी च दुर्दृष्टिर्दुरावासी च दुर्जनः।
यन्मैत्री क्रियते पुम्भिर्नरः शीघ्रं विनश्यति।।
— चाणक्य नीति (02.19)
Translations
Hindi
मनुष्य को चाहिए कि दुराचारी, कुदृष्टि वाले, बुरे स्थान में रहने वाले और दुर्जन मनुष्य के साथ मित्रता न करें, क्योंकि इनके साथ मित्रता करने वाला मनुष्य शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।
English
A wicked person who speaks sweet is not trustworthy. On the tip of his tongue there is honey but dreadful poison in his heart.